पर्सनालिटी डिसऑर्डर के प्रकार और लक्षणपर्सनालिटी डिसऑर्डर के प्रकार और लक्षण

पर्सनालिटी डिसऑर्डर क्या है? (What is personality disorder in Hindi)

पर्सनालिटी डिसऑर्डर (Personality Disorder) एक मानसिक स्वास्थ्य स्थिति (Mental Health Condition) है, जिसमें व्यक्ति की व्यक्तिगत (Personal) और सामाजिक (Social) जीवनशैली (Lifestyle) में स्थायिता ( stability) की कमी होती है। इसमें व्यक्ति की सोचने, अनुभवने (feelings), और व्यवहार में स्थायिता की कमी हो सकती है, जिससे उन्हें स्वयं और अन्यों के साथ संबंध बनाए रखने में कठिनाई हो सकती है।

पर्सनालिटी डिसऑर्डर के कई प्रकार और लक्षण हो सकते हैं, जैसे कि अंतिसमाजी (antisocial), उत्साही (impulsive), अव्यक्तिगत ( impersonal), और अनुसरणशील डिसऑर्डर (follower-ship disorders) आदि। इनमें से प्रत्येक का अपना विशिष्ट लक्षण (specific symptoms) और प्रभाव होता है।

इसमें व्यक्ति की व्यक्तिगतता (individuality), आत्मसमर्पण (dedication), सामाजिक संबंध, और व्यवहार में स्थायिता (stability) की कमी होती है, जिससे उन्हें रोजमर्रा की जीवनशैली में समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। इसका सामान्य इलाज मनोचिकित्सक (Psychiatrist) या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ (Mental health specialist) के साथ सहायता लेना हो सकता है, जिससे व्यक्ति को सही दिशा में मदद मिल सकती है।

पर्सनालिटी डिसऑर्डर के प्रकार और लक्षण

पर्सनालिटी डिसऑर्डर कई प्रकार के हो सकते हैं, और इनमें हर एक का अपना विशिष्ट चरित्र (Unique Character)होता है। यहां कुछ प्रमुख प्रकार और उनके लक्षण दिए जा रहे हैं:

  • अंतिसमाजी पर्सनालिटी डिसऑर्डर (Antisocial Personality Disorder – ASPD): इसमें व्यक्ति का आचरण असामाजिक होता है, और वह किसी की भावनाओं को नहीं समझ पाते हैं । ये व्यक्ति अपने हक में अत्यंत आत्मविश्वासी होते हैं और अनुशासन नहीं मानते।
  •  उत्साही पर्सनालिटी डिसऑर्डर (Histrionic Personality Disorder – HPD): इसमें व्यक्ति ध्यान आकर्षित (attention) करने की कोशिश करता है, और अत्यधिक अभिमानी होता है। उन्हें अनुपयोगी (unhelpful) और अधिराज्यक ढंग से बर्ताव (domineering manner) करने का प्रवृत्ति होता है।
  • अव्यक्तिगत पर्सनालिटी डिसऑर्डर (Avoidant Personality Disorder – AvPD): इसमें व्यक्ति खुद को अजीब या नकारात्मक (negative) मान सकता है और उन्हें समाज में शामिल होने में कठिनाई होती है।
  • अनुसरणशील पर्सनालिटी डिसऑर्डर (Dependent Personality Disorder – DPD): इसमें व्यक्ति अन्य लोगों की सहायता और समर्थन की अत्यधिक आवश्यकता महसूस करता है और स्वयं को असमर्थ मान सकता है।
  • शंकात्मक पर्सनालिटी डिसऑर्डर (Obsessive-Compulsive Personality Disorder – OCPD): इसमें व्यक्ति अत्यधिक क्रमश: और व्यवस्थित होता है, लेकिन उनकी मनःस्थिति और व्यवहार में आत्म-संकट रह सकता है।
  • सीडी (Schizoid Personality Disorder – SPD): इस पर्सनालिटी डिसऑर्डर में व्यक्ति अकेला रहना पसंद करता है और उसे अपने आत्मविकास के लिए व्यक्तिगत जगह देने की आवश्यकता होती है। उन्हें सामाजिक संबंध बनाए रखने में दिक्कत होती है।
  • बोर्डरलाइन पर्सनालिटी डिसऑर्डर (Borderline Personality Disorder – BPD): इसमें व्यक्ति की आत्म-मूल्यमापन (Self-worth) की कमी होती है, जिससे उन्हें स्थितिगत संबंधों (situational relationships) में अस्थिरता (unstable) होती है, और उनमें अचानक की भावनाएं (sudden emotions) उत्पन्न हो सकती हैं।
  • नार्सिसिस्टिक पर्सनालिटी डिसऑर्डर (Narcissistic Personality Disorder – NPD): इसमें व्यक्ति को अपने आप में अत्यधिक प्रेम होता है और वह अपनी महत्ता को अनुभव करने में लिपटा रहता है, जिससे वह अन्यों की भावनाओं को अनदेखा कर सकता है।
  • सिक्किट्सोफ्रेनिया पर्सनालिटी डिसऑर्डर (Schizotypal Personality Disorder – STPD): इसमें व्यक्ति की विचारशीलता, आदर्शवाद, और अनूभूति (perception) में असमानता हो सकती है, जिससे उनका आत्मिक अंदरुनिवार्यता (spiritual insecurity) का अनुभव हो सकता है।
  • डिप्रेशनरी पर्सनालिटी डिसऑर्डर (Depressive Personality Disorder – DPD): इसमें व्यक्ति की दृष्टिकोण में स्थायिता की कमी होती है और वह अक्सर उदास और निराश हो सकता है, जिससे उनके व्यक्तिगत और सामाजिक जीवन में समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।
  • वाचनिक पर्सनालिटी डिसऑर्डर (Passive-Aggressive Personality Disorder – PAPD): इसमें व्यक्ति अपनी आसन्नता (Dislike) और असहमति (disagreement) को व्यक्त करने के लिए सक्रिय रूप से नहीं, बल्कि अस्पष्ट रूप से व्यक्ति के साथ विरोध करता है।
  • सोमेटाइजेशन डिसऑर्डर (Somatization Disorder): इसमें व्यक्ति अपनी मानसिक स्थिति को शारीरिक रूप से व्यक्त कर सकता है, जैसे कि अनेक स्वास्थ्य समस्याएं होने का आभास करना जो वास्तविक नहीं होतीं।
  • पारनॉयड पर्सनालिटी डिसऑर्डर (Paranoid Personality Disorder – PPD): इसमें व्यक्ति की भ्रांतियों और संदेहों की कमी होती है, जिससे उन्हें अन्यों पर अधिक आशंकाएं हो सकती हैं।
  • स्वाभाविक पर्सनालिटी डिसऑर्डर (Organic Personality Disorder): इसमें व्यक्ति की पर्सनालिटी में परिवर्तन उत्पन्न हो सकता है, जो किसी न्यूरोलॉजिकल समस्या या शारीरिक बीमारी के कारण होता है।
  • अवसादी पर्सनालिटी डिसऑर्डर (Dysthymic Personality Disorder): इसमें व्यक्ति अधिकांश समय तक धूप के आलोक में रहने वाला होता है और उसे आत्म-मूल्यमापन (Self-worth) में कठिनाई होती है, जिससे उसका सामाजिक और व्यक्तिगत जीवन प्रभावित होता है।
  • स्वास्थ्यनिष्ठ पर्सनालिटी डिसऑर्डर (Health Anxiety Disorder): इसमें व्यक्ति अपने स्वास्थ्य को लेकर अत्यधिक चिंतित होता है, और वह आमतौर पर सामाजिक और पेशेवर जीवन में यह चिंता करता है कि कोई गंभीर बीमारी हो सकती है।
  • सोशल आनक्षिटी पर्सनालिटी डिसऑर्डर (Social Anxiety Personality Disorder): इसमें व्यक्ति को सामाजिक स्थितियों में घबराहट और अवसाद हो सकता है, जिससे वह सामाजिक घटनाओं से बचने का प्रयास कर सकता है।
  • पर्सनालिटी डिसऑर्डर नोट अलइस्क्रिप्टिव (Personality Disorder Not Otherwise Specified – PDNOS): इसमें व्यक्ति की पर्सनालिटी में अनैतिकता होती है, लेकिन यह किसी विशिष्ट प्रकार का डिसऑर्डर नहीं है जो पूरी तरह से परिभाषित किया जा सकता है।
  • आत्म-हत्या समर्थन पर्सनालिटी डिसऑर्डर (Suicidal Support Personality Disorder): इसमें व्यक्ति को आत्महत्या की इच्छा हो सकती है और उसे अपनी समस्याओं का हल नहीं दिखाई जा सकता है।
  • कॉम्पलेक्स पोस्ट-ट्रौमैटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर (Complex Post-Traumatic Stress Disorder – CPTSD): इसमें व्यक्ति को बड़े पैम्बर में हुई घातक घटनाओं के बाद विकसित होने वाली स्थिति हो सकती है, जिससे उनमें व्यक्तिगत और सामाजिक संबंधों में असमानता होती है।
  • प्रणय संबंध विकार (Erotomanic Delusional Disorder): इसमें व्यक्ति को विशेषत: अश्रुविनाशक की भावना होती है और वह अपने आत्म-मूल्यमापन में गिरावट महसूस कर सकता है।
  • स्टॉकहोल्म सिंड्रोम (Stockholm Syndrome): इसमें व्यक्ति को उसके उत्पीड़कर्ता के प्रति अस्वतंत्र प्रेम हो सकता है और वह उनके खिलाफ किए जा रहे दुराचारों को नकारात्मकता से देख सकता है।
  • पर्सनालिटी डिसऑर्डर से संबंधित खुद-हत्या (Personality Disorder-Related Suicide): इसमें व्यक्ति को उसके पर्सनालिटी डिसऑर्डर के कारण सुसाइड करने का ख़याल हो सकता है।

इन पर्सनालिटी डिसऑर्डर्स के प्रति सही जागरूकता और उपचार की आवश्यकता होती है। यह महत्वपूर्ण है कि व्यक्ति एक मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सहायता लें ताकि वे अपनी स्थिति को समझें और ठीक तरीके से इलाज कराएं।

  1. जागरूकता बढ़ाएं: सही जागरूकता बढ़ाने के लिए समाज में पर्सनालिटी डिसऑर्डर्स के बारे में शिक्षा को बढ़ावा देना चाहिए। लोगों को इस बारे में जानकारी देना और उन्हें उपचार तक पहुँचाने के लिए सामाजिक जागरूकता बढ़ाना आवश्यक है।

  2. सही डायग्नोसिस और उपचार: यदि किसी को पर्सनालिटी डिसऑर्डर के संकेत हैं, तो वह शीघ्र मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए। सही डायग्नोसिस के बाद उपचार की योजना बनाई जा सकती है जो व्यक्ति को सहायता प्रदान करने में मदद कर सकती है।

  3. मानसिक स्वास्थ्य समर्थन सेवाएं: सामाजिक सेवा संगठन और मानसिक स्वास्थ्य केंद्र जैसी संगठनें व्यक्तियों को उपचार, समर्थन, और सहायता प्रदान करने के लिए हैं। ये सेवाएं व्यक्तिगत आवश्यकताओं के अनुसार डिज़ाइन की जाती हैं।

  4. समर्थन समृद्धि समूह: व्यक्तियों को अपनी बात साझा करने और समझाने का मौका मिलता है जब वे समर्थन समृद्धि समूहों में शामिल होते हैं। ये समूह आत्म-सहायता और समर्थन प्रदान कर सकते हैं।

  5. परिवार समर्थन: परिवार का समर्थन बहुत अहम है, और अगर किसी को पर्सनालिटी डिसऑर्डर है, तो परिवार को भी इस बारे में शिक्षित होना चाहिए। सहायता और समर्थन के लिए एक दूसरे का साथ देना महत्वपूर्ण है।

  6. आत्म-प्रबंधन टूल्स और तकनीकें: व्यक्ति को अपनी मानसिक स्वास्थ्य को सुरक्षित रखने के लिए आत्म-प्रबंधन टूल्स और तकनीकों का उपयोग करना चाहिए। इसमें मेडिटेशन, योग, और स्वास्थ्यपूर्ण आदतें शामिल हो सकती हैं जो मानसिक स्वस्थता को बढ़ावा देने में मदद कर सकती हैं।

  7. पर्सनल काउंसलिंग और थेरेपी: मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ या मानव-संबंधित विशेषज्ञ से योजना बनाने और समस्याओं का सामना करने के लिए पर्सनल काउंसलिंग और थेरेपी लाभकारी हो सकती है।

  8. दवा और मेडिकल समर्थन: कुछ पर्सनालिटी डिसऑर्डर्स के इलाज में दवाओं का सही समय पर उपयोग किया जा सकता है। मेडिकल समर्थन व्यक्ति को उचित दवा या औषधि प्रदान करने के लिए मदद कर सकता है।

  9. जीवनशैली परिवर्तन: स्वस्थ जीवनशैली अपनाना भी महत्वपूर्ण है। सही आहार, नियमित व्यायाम, और पर्याप्त आराम मिलने पर मानसिक स्वास्थ्य में सुधार हो सकता है।

  10. समर्थनीय परिवार और सहयोगी दोस्त: पर्सनालिटी डिसऑर्डर के साथ जीने वाले व्यक्ति के लिए समर्थनीय परिवार और सहयोगी दोस्तों का होना महत्वपूर्ण है। उनसे बातचीत करना और उनका साथ देना उन्हें मानसिक समर्थन प्रदान कर सकता है।

Conclusion

समर्थनीय विशेषज्ञता और सहारा व्यक्ति की मानसिक स्वास्थ्य स्थिति में सुधार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। पर्सनालिटी डिसऑर्डर्स को समझना और उनका समवायिक इलाज करना सामाजिक जागरूकता बढ़ाने और लोगों को सही दिशा में मार्गदर्शन करने का सुझाव देता है।

यह महत्वपूर्ण है कि हम समझें कि मानसिक स्वास्थ्य भी हमारे सामाजिक और व्यक्तिगत जीवन का अभिन्न हिस्सा है और उसकी सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा जाना चाहिए। पर्सनालिटी डिसऑर्डर्स को सही से पहचानना और उपचार की योजना बनाना व्यक्ति को सही मार्ग पर ले जाने में मदद कर सकता है।

आपसी समर्थन, समझदारी, और सहारा देना व्यक्ति को उत्तेजना और समर्थन की ओर बढ़ा सकता है, जिससे उन्हें आत्मविश्वास मिलता है कि वे अपनी समस्याओं का सामना कर सकते हैं और सकारात्मक रूप से जीवन को निर्माण कर सकते हैं। मानव-संबंधों के माध्यम से, हम समृद्धि, समर्थन, और अच्छे स्वास्थ्य की दिशा में साथी बन सकते हैं और इस प्रकार एक समर्थनीय और समर्थ समाज की दिशा में कदम बढ़ा सकते हैं।

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