Diabetes Treatment

Diabetes Treatment in hindi | मधुमेह से कैसे छुटकारा पाएं

मधुमेह क्या है ( What is Diabetes Treatment )

हर बीमारी का कोई न कोई इलाज होता है , परंतू मधुमेह (Diabetes) एक ऐसी बीमारी है | जो किसी को हो जाए तो इसे कंट्रोल करने के अलावा कोई रास्ता नहीं होता । मधुमेह जिसे हम शुगर (Blood sugar ) के नाम से भी जानते हैं 

आज के युग में एक गंभीर समस्या है। मधुमेह को साइलेंट किलर (Silent killer) भी कहा जाता है। जैसे वाहन को चलाने के लिए ऊर्जा (energy) के रूप में ईधन की जरूरत होती हैं वैसे ही हमारे शरीर को ऊर्जा के रूप में ग्लूकोज (Glucose) की जरूरत होती हैं। 

ग्लूकोज हमे  हमारे खाद्ध पदार्थ (Food) से प्राप्त होता है  जिसे रक्त (blood) के माध्यम से हमारे कोशिका(cells) तक पहुचाया जाता है। अब ग्लूकोज को कोशिका के अंदर जाने के लिए पैंक्रियाज (Pancreas) द्वारा बनाई गई इंसुलिन (insulin) एक चाभी का काम करती  है। 

इंसुलिन के बिना ग्लूकोज ब्लड में प्रवेश नहीं कर पाता। जिसका मतलब है, अगर इंसुलिन ना हो तो ग्लूकोज कोशिका के अंदर प्रवेश नहीं कर पाएगा और ब्लड में ही रह जाएगा। जिससे ब्लड में ग्लूकोज की मात्रा बढ़ रही होती हैं , जिसे हम मधुमेह कहते हैं। मधुमेह आगे जाकर हार्ट अटैक (Heart attack) जैसी समस्या का कारण बन सकता है।

अब हम मधुमेह ( Diabetes Treatment) की समस्या और उसके निवारण पर चर्चा करते हैं

मधुमेह को क्यों नियंत्रण करे ( Why is diabetes treatment needed?)

मधुमेह एक ऐसी बीमारी है जिसे अगर कंट्रोल नहीं किया जाए , तो एक गंभीर समस्या का रूप ले सकती हैजैसे –

मधुमेह के लक्षण ( Symptoms of Diabetes in hindi)

मधुमेह (Diabetes) तीन तरह के होते हैं -

Diabetes Treatment

टाइप 1 मधुमेह (Diabetes Type-1)

टाइप 1 मधुमेह (Diabetes type-1)  के बहुत कम मरीज देखने को मिलते हैं। आए जानते हैं टाइप 1 मधुमेह  कैसे होता है। 

ग्लूकोज (Glucose) को कोशिका (Cells) में प्रवेश करने के लिए इंसुलिन(insulin) की आवश्यकता होती है। अगर पैंक्रियाज (pancreas) किसी कारण वस इंसुलिन नहीं बना पाता या किसी दुर्घटना के कारण आप के पैनक्रियाज को शरीर से निकालना पडे, तो ऐसी परस्थिति में ग्लूकोज भी कोशिका में नहीं जा पाएगा जो की टाइप-1 मधुमेह  का कारण बनता है। 

टाइप 1 मधुमेह से पीड़ित व्यक्ति के उम्र की कोई सीमा नहीं  होती है। टाइप 1 मधुमेह किसी को भी हो सकता है। टाइप 1 मधुमेह  से पीड़ित व्यक्ति को बराबर समय पर इंसुलिन की खुराक (insulin dose) लेने की आवश्यकता पड़ती है।

 टाइप 1 मधुमेह (Diabetes type 1) में बॉडी में इंसुलिन (Insulin) की पूर्ति ना होने के कारण , मरीज को बाहर से इंजेक्शन ( injection) द्वारा बॉडी में इंसुलिन (insulin dose) लेना पड़ता है।

टाइप 2 मधुमेह (Diabetes Type-2)

मधुमेह (Diabetes type 2) एक ऐसी बीमारी है, जो एक बार साथ पकड़ ले तो जीवन पर्यन्त साथ नहीं छोड़ती है । ऐसी परिस्थिति मे  मरीज  को मधुमेह कंट्रोल (how to control blood sugar level) में रखने के लिए हमेशा अंग्रेजी दवा (medicine)लेना पड़ता है, जिसके दुष्प्रभाव (side effect) भी होते है।

 जिसमे समझ नहीं आता दवा ले या ना ले। ऐसे मे सबसे बढ़िया घरेलु और प्राकृतिक उपाय ( natural home remedies) होता है। मधुमेह  से बचने के कुछ घरेलू उपाय (diabetes treatment ) जिसे करने से आप को किसी प्रकार की कोई भी अन्य दवा लेने की कोई जरूरत नहीं है।

Diabetes Treatment

सादा भोजन करे, भोजन जैसे चपाती, दाल, सब्जी में कढ़ी के पत्ते का प्रयोग करें। हरी पत्तेदार सब्जियाँ ( leafy grean vegetables) ज्यादा से ज्यादा खाएं। सब्जियों ,में भिंडी , करेला, तोरई , लौकी , पालक , मेथी , चौलाई , आदि शामिल करें। 

जामुन के 3 से 4 महीने के सीजन (season) में रोज 8 से 10 जामुन खाएं , और जब जामुन का सीजन खत्म हो जाए । तो जामुन का बीज एकत्रित करके उसका अच्छे से पाउडर बनाएं ,और उसमे काला नमक मिलाकर पूरे साल रोजाना खाए ।

अगर आप जल्दी ब्लड शुगर लेवल ( Diabetes) कण्ट्रोल करना चाहते हैं , या अपनी दिनचर्या में यह सब शामिल नहीं कर पा रहे हैं  तो आप आयुर्वेदिक मेडिसिन (Ayurvedic Medicine) फिलॉजिक्स डायबिटीज केयर(Philogics Diabetes Care) ले सकते हैं |

यह काफी अच्छी और असरदार दवा है , शुद्ध आयुर्वेदिक(Pure ayurvedic) है और बेल पत्र , करेला , मूसली सफ़ेद अरारोट आदि जड़ी-बूटिओं से मिलकर बनी है । यह इन्सुलिन को सक्रिय ( Activate insulin) करके रक्त शर्करा (blood sugar) को नियंत्रित करती है

गर्भकालीन मधुमेह (gestational diabetes mellitus.)

तीसरी तरह की डायबिटीज़, गर्भवती महिला  को गर्भ के समय  (Pregnancy time)गर्भ मे मौजूद प्लेसेंटा यानि अपरा इंसुलिन को कोशिका तक जाने से रोकता है।

 जिससे ग्लूकोज कोशिका में प्रवेश नहीं कर पाता ,और खून मे ग्लूकोज़ की मात्रा बढ़ जाती है। गर्भकालीन मधुमेह गर्भ के अंत तक साथ ही समाप्त हो जाता है। गर्भकालीन मधुमेह  के समय ज्यादा दिक्कत होने पर डॉक्टर के आदेशानुसार महिला को इंसुलिन का इंजेक्शन भी लेना होता है।

 

मुझे उम्मीद हैं , मधुमेह की समस्या ( Diabetes )को ठीक करने के लिए करने में यह लेख काफी मददगार रहेगा | यह  जानकारी आपको कितनी मददगार लगी ,और किस विषय पर आप जानकारी चाहते हैं कमैंट्स करके जरूर बताएं |

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